“John Abraham पर Vivek Agnihotri का वार: ‘Protein खाओ, बाइक चलाओ… The Kashmir Files पर मत बोलो'”

विषय वस्तु (Table of Contents)

भागविवरण
1. विवाद का बैकग्राउंडJohn Abraham का बयान और Agnihotri की प्रतिक्रिया
2. कंट्रोवर्सी की टाइमलाइनमुख्य घटनाएँ और तारीखें
3. पब्लिक और एक्सपर्ट रिएक्शनसामाजिक और कानूनी प्रतिक्रिया
4. Bengal Files फिल्म का कंटेक्स्टट्रायोलॉजी में जगह और विवरण
5. विवादों के बीच—गॉसिप vs तथ्यTMC काउंटर और कानूनी नोटिस
6. निष्कर्ष & CTAप्रभाव और आपका कॉल टू एक्शन

विवाद का बैकग्राउंड

कुछ दिन पहले, John Abraham, जिन्होंने 2007 में Agnihotri की फ़िल्म Dhan Dhana Dhan Goal में काम किया था, एक इंटरव्यू में कहते हैं कि वो “Kashmir Files जैसी राजनीतिक फ़िल्में जो माहौल को प्रभावित करती हैं, वो नहीं बनाएंगे।”

इस बयान पर Vivek Agnihotri का जवाब :

“John Abraham इतिहासकार नहीं हैं… बहुत जिंजोइस्टिक फ़िल्में बनाते हैं। उन्हें सिर्फ ‘प्रोटीन खाना, बाइक चलाना’ पसंद है—फ़िल्मों में उलझने से बेहतर होगा चुप रहें।”

उन्होंने सवाल उठाया—“भारत का माहौल कभी गैर-राजनीतिक रहा था क्या? हिंदू-मुस्लिम या जातिगत मसले कैसे संवेदनहीन हो सकते हैं?”

 

कंट्रोवर्सी की टाइमलाइन

तारीखघटना
12 अगस्त 2025John का बयान आया कि वह ऐसी राजनीतिक फ़िल्में नहीं बनाएंगे।
22 अगस्त 2025Vivek ने  तीखा जवाब दिया।

पब्लिक और एक्सपर्ट रिएक्शन

  • सोशल मीडिया पर:

    • कुछ लोग कह रहे हैं—“Vivek Agnihotri ने पलटवार कर दिया! सच्चाई उसी वक्त सामने आई।”

    • वहीं कुछ लिख रहे—“John Abraham ने सही कहा, सिनेमा से आगे का संदेश बहुत भारी हो गया है।”

  • एक्सपर्ट व्यू

    • समाजशास्त्रियों का कहना: “फ़िल्में ज़्यादा राजनीतिक हो रही हैं—यहां पर संतुलन ज़रूरी है।”

    • कानूनी विशेषज्ञों ने टिप्पणी की कि “स्वतंत्र अभिव्यक्ति का हक़ है—पर जवाबदेही भी जरूरी है।”

 

The Bengal Files का संदर्भ

यह विवाद इसी समय ज़मीनी रूप लेता है जब Vivek Agnihotri की “The Bengal Files” रिलीज़ के करीब है—यह उनकी Files Trilogy (Tashkent, Kashmir, Bengal) की तीसरी कड़ी है।
इस फ़िल्म की कहानी 16 अगस्त 1946 के क़ालकत्ता दंगों पर आधारित है और इसे 5 सितंबर 2025 को रिलीज़ किया जाएगा।

John Abraham

विवादों के बीच—गॉसिप vs तथ्य

फ़िल्म की ट्रेलर लॉन्च कोलकाता में दो बार तकनीकी वजहों से रोका गया, जिसके पीछे Agnihotri ने राजनीति और “डेमोग्राफिक बदलाव” का हाथ बताया।

न्यायाल की चेतावनी भी सामने आई—Gopal Pattha के पोते ने फ़िल्म के कथित गलत चित्रण को लेकर कानूनी नोटिस भेजा है।

उसके अलावा, TMC ने Agnihotri पर आरोप लगाया कि वे चुनाव पूर्व राजनीतिक फ़िल्म बना रहे हैं और कहा “Godhra Files” और “Manipur Files” क्यों नहीं बनाते?

एक्टर Saswata Chatterjee ने कहा कि वे इतिहासकार नहीं हैं और इस विवाद से खुद को अलग रखते हैं।

निष्कर्ष और CTA

यह पूरा विवाद—John Abraham के बयान से शुरू होकर Bengal Files की रिलीज़ तक—सिर्फ एक फिल्म या आलोचना नहीं, बल्कि समाज में आज की सांस्कृतिक राजनीति और अभिव्यक्ति की लकीरों पर सवाल खड़ा कर रहा है

अब सवाल खुद आपके सामने है:

  • क्या फिल्म को सिर्फ राजनीतिक एजेंडा बताया जाना चाहिए—या इसे एक सिनेमा कहा जाना चाहिए जो सवाल उठाती है?

  • क्या फ़िल्मकारों की स्वतंत्रता के साथ-साथ सच की परतों को समझना हमें ज़रूरी नहीं लगता?

आपकी बारी: अपनी राय कमेंट में बताएं!

  • क्या आपको लगता है John Abraham का रुख समझ में आता है?

  • या Vivek Agnihotri का पलटवार जायज़ है?

  • आपके अनुसार फ़िल्मों की राजनीतिक भूमिका क्या होनी चाहिए?

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