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“NRI bride का 5-स्टार शादी विवाद: फोटोग्राफर्स को खाना देने से किया इंकार, बोली– ₹1.5 लाख का extra खर्चा!”

📑 विषय सूची

  1. मामला क्या है?

  2. NRI Bride का तर्क – ₹1.5 लाख का खर्च

  3. फोटोग्राफर्स का पलटवार

  4. खाने के टाइम स्लॉट को लेकर विवाद

  5. एडवांस पेमेंट पर टकराव

  6. सोशल मीडिया की राय

  7. निष्कर्ष – सीख क्या है?

मामला क्या है?

दिल्ली के एक फाइव-स्टार होटल में हुई शादी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा मुद्दा बनी हुई है। वजह? अमेरिका में काम करने वाली एक NRI Bride और दिल्ली के नामी फोटोग्राफी ग्रुप We Don’t Say Cheese (WDSC) के बीच जोरदार टकराव।

शादी के बाद NRI Bride ने इस टीम को गूगल पर 1-स्टार रिव्यू दे डाला। वजह थी—शादी में काम करने आए फोटोग्राफर्स को खाना न खिलाना और उन्हें खुद से ब्रेक लेकर बाहर जाकर खाने की इजाजत न देना।

NRI Bride का तर्क – ₹1.5 लाख का खर्च

NRI Bride का कहना था कि शादी पहले ही बहुत महंगी होती है और वेन्यू फाइव-स्टार होटल होने की वजह से खाने का खर्च आसमान छू रहा था।

  • एक प्लेट की कीमत: ₹6,000+

  • फोटोग्राफी टीम: 7-8 लोग

  • शादी के कई फंक्शन

👉 यानी सिर्फ खाने पर करीब ₹1.5 लाख का खर्चा बैठता। दुल्हन का साफ कहना था—

“वेंडर्स शादी का मज़ा लेने नहीं आते, वे सिर्फ काम करने आते हैं।”

फोटोग्राफर्स का पलटवार

टीम हेड ऋचा ओबेरॉय ने इस रिव्यू का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए दुल्हन को आड़े हाथों लिया।

उन्होंने लिखा:

“हम शादी के दिन 12-15 घंटे लगातार खड़े रहते हैं, भारी कैमरा उठाते हैं, हर पल कैप्चर करने दौड़ते हैं। ऐसे में कम से कम एक खाना तो मिलना चाहिए। हमें बाहर भेजना मतलब काम की क्वालिटी गिराना।”

ओबेरॉय ने यह भी कहा कि वे खर्च कम करने के लिए प्लेट शेयर करने तक तैयार थे, लेकिन दुल्हन ने इनकार कर दिया।

NRI bride

खाने के टाइम स्लॉट को लेकर विवाद

NRI Bride  ने कहा कि अगर टीम खुद खाना ऑर्डर करना चाहती है तो कर सकती है। लेकिन उन्होंने ये शर्त रखी कि फोटोग्राफर्स को खाना खाने के लिए एक-एक घंटे का ब्रेक चाहिए होगा, जो शादी के फंक्शन मिस कराने जैसा है।

दुल्हन का कहना था:

“उन्होंने सुबह नाश्ता किया होगा, 4 बजे तक कुछ स्नैक्स भी मिल जाते। फिर भी उन्हें अलग टाइम स्लॉट चाहिए था। ये अजीब लगा।”

लेकिन ओबेरॉय का कहना था:

“ये कोई फाइन-डाइनिंग का मामला नहीं, ये तो बुनियादी इज़्ज़त का मामला है। हमें ये हक़ है कि कब खाना है, ये हम तय करें, न कि दुल्हन।”

एडवांस पेमेंट पर टकराव

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। NRI Bride का कहना था कि फोटोग्राफर्स शादी से पहले ही फुल एडवांस पेमेंट मांग रहे थे, जो इंडस्ट्री प्रैक्टिस नहीं है।

लेकिन ओबेरॉय का कहना है कि वे मानती थीं कि थोड़ा पैसा रोका जा सकता है, मगर बहुत बड़ा अमाउंट रोकना काम के साथ नाइंसाफी है।

सोशल मीडिया की राय

यह विवाद सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोगों ने जमकर राय दी।

कुछ लोग NRI Bride के पक्ष में:

  • “शादी पहले से ही महंगी है, 10 लोगों का खाना अलग से खिलाना बहुत है।”

कुछ लोग फोटोग्राफर्स के साथ:

  • “12-15 घंटे काम करने वाले लोगों को खाना न देना बुनियादी इंसानियत के खिलाफ है।”

  • “ये मेहमानों जैसा ट्रीटमेंट नहीं, बल्कि वर्कर्स की dignity की बात है।”

निष्कर्ष – सीख क्या है?

यह मामला सिर्फ एक शादी का विवाद नहीं, बल्कि भारत में शादी इंडस्ट्री और कामगारों की स्थिति पर एक बड़ा सवाल है।

  • क्या वेंडर्स सिर्फ मशीन हैं, जिन्हें बिना ब्रेक काम करना चाहिए?

  • या फिर वे भी इंसान हैं, जिन्हें बेसिक सुविधाएं मिलनी चाहिए?

👉 सच्चाई शायद बीच में कहीं है। शादी के खर्चे जितने भी हों, बेसिक रिस्पेक्ट और सुविधाएं किसी भी प्रोफेशनल का हक़ हैं।

✍️ आख़िरी बात

NRI Bride और फोटोग्राफर्स का यह झगड़ा शायद आने वाले वक्त में एक केस स्टडी बनेगा।
शादी सिर्फ दिखावे का नहीं, इंसानियत का भी इवेंट है।

तो अगली बार जब आप शादी प्लान करें, याद रखिए—
“फोटो तो लाइफटाइम रहते हैं, पर इज़्ज़त और इंसानियत उससे भी बड़ी होती है।”

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