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“‘Butcher’ या ‘Saviour’? Vivek Agnihotri की The Bengal Files पर उठे सवाल, सामने आई Gopal Patha की असली दास्तान”

📑 Table of Contents

  1. Gopal Patha कौन थे?

  2. 1946 का ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ और खून-खराबा

  3. कलकत्ता को बचाने वाला या दंगे फैलाने वाला?

  4. Gandhi Ji बनाम Gopal Patha – एक अलग सोच

  5. क्या वो सच में मुस्लिम विरोधी थे?

  6. परिवार का आरोप और The Bengal Files विवाद

  7. निष्कर्ष – हीरो या कसाई?

Gopal Patha कौन थे?

गोपाल चंद्र मुखर्जी, जिन्हें लोग प्यार से “गोपाल पाठा” कहते थे, का जन्म 1913 में कोलकाता में हुआ था। “पाठा” का मतलब बकरी होता है, और उनके परिवार का कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट पर बकरे का मीट शॉप था।

सिर्फ 5 फीट 4 इंच लंबे गोपाल का कद भले छोटा था, लेकिन हिम्मत और ताकत बहुत बड़ी। लंबे बाल, दाढ़ी और जेंटलमैन जैसा लुक—लेकिन पुलिस उन्हें एक गैंग लीडर और अपराधी मानती थी, जिनके इशारे पर सैकड़ों लड़के जान देने-मारने को तैयार रहते।

1946 का ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ और खून-खराबा

मुस्लिम लीग और जिन्ना ने 16 अगस्त 1946 को “डायरेक्ट एक्शन डे” बुलाया। मक़सद था—कलकत्ता को पाकिस्तान में शामिल करना

  • जगह-जगह भड़काऊ भाषण

  • हिंदुओं के घर जलाए गए

  • दुकानें लूटी गईं

  • बलात्कार और हत्याएं हुईं

17 अगस्त तक हिंदू समुदाय ने भी पलटवार शुरू कर दिया। यहीं से Gopal Patha मैदान में उतरे। उनके लड़कों ने लाठियों, चाकुओं, यहां तक कि अमेरिकन सैनिकों से खरीदी रिवॉल्वर तक का इस्तेमाल किया।

मोटे मारवाड़ी व्यापारी भी पैसा देकर इस संघर्ष में मदद कर रहे थे। गोपाल ने अपने लड़कों को साफ आदेश दिया –
👉 “एक हिंदू मारा जाए, तो दस मुस्लिम लीगियों को मारो।”

Gopal Patha

कलकत्ता को बचाने वाला या दंगे फैलाने वाला?

ब्रिटिश पत्रकार एंड्रयू व्हाइटहेड ने लिखा –
“कलकत्ता जल रहा था, और Gopal Patha ने जैसे आग पर पेट्रोल डाल दिया।”

लेकिन खुद Gopal Patha का कहना था कि वो सिर्फ “लोगों को बचाने का कर्तव्य निभा रहे थे”। उनके दम पर मुस्लिम लीग कलकत्ता को पाकिस्तान में मिलाने का सपना छोड़ना पड़ा।

Gandhi Ji बनाम Gopal Patha – एक अलग सोच

1947 में जब गांधीजी शांति संदेश लेकर कोलकाता पहुंचे, हजारों लोगों ने हथियार डाल दिए। लेकिन गोपाल ने इनकार किया।

उनका कहना था –
👉 “ग्रेट कलकत्ता किलिंग के समय गांधीजी कहां थे? मैं क्यों हथियार डालूं?”

क्या वो सच में मुस्लिम विरोधी थे?

Gopal Patha पर सबसे बड़ा सवाल यही उठता है। क्या वो “हिंदुओं का रक्षक” थे या “मुस्लिम विरोधी कसाई”?

उनके पोते संतनु मुखर्जी का दावा है –

  • उन्होंने कई मुस्लिम परिवारों को अपने घर की छत पर छुपाया।

  • एक रिक्शावाले रफीक चाचा और उनके परिवार को भी बचाया।

  • आज भी इलाके के मुस्लिम उनके परिवार का सम्मान करते हैं।

1997 में एक इंटरव्यू में खुद Gopal Patha ने कहा था –
👉 “मेरे सख्त आदेश थे – औरतों को मत छूना, लूट मत करना। चाहे वो मुस्लिम ही क्यों न हों।”

परिवार का आरोप और The Bengal Files विवाद

गोपाल मुखर्जी की मौत 2005 में हुई। लेकिन उनका नाम एक बार फिर जिंदा हुआ Vivek Agnihotri की The Bengal Files से।

परिवार का आरोप है कि –

  • फिल्म में उन्हें “मुस्लिम हेटर बुचर” दिखाया गया है।

  • उनकी विचारधारा और असली संघर्ष को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।

  • इसी वजह से गोपाल के पोते ने FIR दर्ज कराई है और फिल्म का विरोध शुरू किया है।

📊 Quick Facts Table

तथ्यविवरण
नामगोपाल चंद्र मुखर्जी (गोपाल पाठा)
जन्म1913, कोलकाता
प्रसिद्धि1946 कलकत्ता दंगों में भूमिका
आदेश“10 के बदले 1 की मौत” का नियम
निधन2005
परिवार का दावाउन्होंने मुस्लिमों को भी बचाया

निष्कर्ष – हीरो या कसाई?

Gopal Patha की असली पहचान आज भी विवादों में है। कुछ लोग उन्हें “कलकत्ता का रक्षक” मानते हैं, तो कुछ उन्हें “खूनी कसाई” कहते हैं।

परिवार का कहना है कि सच कहीं और है – गोपाल न तो कसाई थे, न ही संत। वो एक ऐसे इंसान थे जो अपने शहर को बचाने के लिए हथियार उठाने से पीछे नहीं हटे।

 

✍️ अंतिम बात (Call To Action)

आज जब The Bengal Files जैसी फिल्में इतिहास की परतें खोलने की कोशिश कर रही हैं, सवाल यह है कि –
👉 क्या हम अपने नायकों को सही पहचान दे पाए हैं?
👉 या फिर राजनीतिक और सिनेमाई एजेंडा के बीच सच्चाई कहीं दबकर रह जाएगी?

दोस्तों, आपको क्या लगता है—Gopal Patha हीरो थे या कसाई?
कमेंट में अपनी राय ज़रूर बताइए।

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